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गृहमंत्री शास्त्री को पत्रदि. 27 फरवरी 1963 को श्री गुरुजी ने काशी से गृहमंत्री लालबहादुर शास्त्री को हिन्दी में निम्नलिखित पत्र लिखा : श्री महाशिवरात्रि के पुण्य पर्व पर भगवान पशुपतिनाथ के दर्शन करने हेतु मैं काठमाण्डू गया था। वहाँ लगभग तीन दिन रहकर श्री महाराजाधिराजजी के दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त किया। जो मैं समझ सका उसका कुछ उल्लेख मान्यवर प्रधानमंत्रीजी को लिखे पत्र में मैंने किया है। उस पत्र की प्रतिलिपि साथ में भेज रहा हूँ। अपनी ओर से होने वाले व्यवहार में कुछ सुधार करने से, उचित सम्मान देकर सौहार्दपूर्ण संबंध प्रस्थापित करने से तथा नेपाल की आर्थिक, शैक्षणिक आदि आवश्यकताओं को समझ कर उचित नीति का अवलम्बन करने से नेपाल शीघ्र ही एक सबल, अभिन्न-हृदय स्नेही, सीमा संरक्षक बन्धु के रूप में खड़ा हो सकता है। भारत एवं नेपाल दोनों के हित परस्पर निबध्द हैं। अतः अपनी सुरक्षितता की दृष्टि से भी संबंधों में सुधार होना तथा निष्कपट मित्रता प्रस्थापित होना अत्यावश्यक है। आप शीघ्र ही सद्भाव निर्माण हेतु नेपाल जा रहे हैं। आपके आगमन की वहाँ उत्सुकता से, आशा से प्रतीक्षा हो रही है। अपनी कुशलता से, स्निग्धा व्यवहार से, मधुर वाणी से आप वहाँ के प्रमुख पुरुषों के मन के सब संदेह दूर कर, आज तक भारतीय अधिकारियों के रुक्ष, आत्मीयताशून्य व्यवहार से उत्पन्न कटुता को हटाकर, आवश्यकता हो तो ऐसे व्यवहार जिनके द्वारा जानबूझकर या अनवधानता से हुए हों उनके स्थान पर अधिक उदात्त, स्नेहभावसंपन्न व्यक्तियों को नियुक्त करने का विचार कर, नेपाल का भारत से अटूट स्नेह, परस्परपूरकता के संबंध प्रस्थापित कर अपनी यात्रा के उद्देश्य में सफल होंगे, ऐसा मेरा विश्वास है। आगे कभी आपसे मिलने का अवसर प्राप्त हुआ तो वहाँ की स्थिति की जितनी जानकारी मैं प्राप्त कर सका तथा जो उपाय मुझे सूझते हैं, आपसे निवेदन कर सकूँगा। परन्तु यह कब होगा, कैसे होगा आदि सब श्री भगवान की इच्छा पर निर्भर है। दि. 28-2-63 को मैं यहाँ से चलकर कलकत्ता होता हुआ उत्कल प्रान्त में चार दिन के लिए जा रहा हूँ। दि. 6-3-63 को नागपुर पहुँच कर लगभग तीन सप्ताह वहीं रहने का विचार है। |
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