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जम्मू-कश्मीर के विलय में योगदानमाधवराव मुले केन्द्रीय गृहमंत्री सरदार पटेल ने जम्मू-कश्मीर रियासत के दीवान श्री मेहरचन्द महाजन से हिन्दुस्थान के साथ विलीनीकरण (accession) करने के लिए कश्मीर-नरेश श्री हरिसिंह जी को तैयार करने के लिए कहा था। श्री मेहरचन्द महाजन ने श्रीगुरुजी के पास संदेश भिजवाया कि वे कश्मीर-नरेश से मिलकर उन्हें इस विलीनीकरण के लिए तैयार करें। श्री महाजन जी के ही प्रयास से कश्मीर-नरेश और श्रीगुरुजी की भेंट की तिथि निश्चित हो सकी। हवाई जहाज से श्रीगुरुजी 17 अक्तूबर, 1947 को श्रीनगर पहुँचे। भेंट 18 अक्टूबर को प्रात: हुई। भेंट के समय 15-16 वर्षीय युवराज कर्णसिंह जांघ की हड्डी टूटने से प्लास्टर में बंधे वहीं लेटे हुए थे। श्री मेहरचन्द महाजन भेंट के समय उपस्थित थे। कश्मीर-नरेश का कहना था - मेरी रियासत पूरी तरह से पाकिस्तान पर अवलम्बित है। सारे रास्ते सियालकोट तथा रावलपिण्डी की ओर से है। रेल सियालकोट की ओर से है। मेरे लिये हवाई अड्डा लाहौर का है। अत: हिन्दुस्थान के साथ मेरा संबंध किस तरह बन सकता है? श्रीगुरुजी ने समझाया - आप हिन्दू राजा हैं। पाकिस्तान में विलय (accede) करने से आपको और आपकी हिन्दू प्रजा को भीषण संकटों से संघर्ष करना होगा। यह ठीक है कि अभी हिन्दुस्थान से रेल के रास्ते और हवाई मार्ग का कोई सम्पर्क नहीं है, किन्तु इन सबका प्रबन्ध शीघ्र ही हो जायेगा। आपका और जम्मू-कश्मीर रियासत का भला इसी में है कि आप हिन्दुस्थान के साथ विलीनीकरण (accede) कर लें। श्री मेहरचन्द महाजन ने कश्मीर-नरेश से कहा : गुरुजी ठीक कह रहे हैं। आपको हिन्दुस्थान के साथ रियासत का विलय करना चाहिए। अंत में कश्मीर-नरेश ने श्रीगुरुजी को तूस की शाल भेंट की। इस प्रकार जम्मू-कश्मीर के भारत-विलय में श्रीगुरुजी का बहुत महत्वपूर्ण योगदान रहा। |
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