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श्री बाबाजी का निर्वाणइसके बाद श्री स्वामी अखण्डानन्द जी का स्वास्थ्य निरन्तर गिरता गया। 6 फरवरी की शाम श्री स्वामी जी का स्वास्थ्य चिकित्सकीय उपचारों के बावजूद बहुत शोचनीय हो गया। उपचार हेतु स्वामी जी को बड़ी कठिनाई से कलकत्ता लाया गया। पूरे रास्ते श्री माधवराव उनकी सेवा में अन्तिम क्षण तक लगे रहे। 7 फरवरी को स्वामी अखण्डानन्द जी का 3.00 बजे मधर्यौं निर्वाण हो गया। मार्च 1937 में श्री माधवराव, श्री अमिताभ महाराज के साथ नागपुर लौट आए (दात्ये, हरि विनायक, वही, पृष्ठ 46, भिशीकर, च.प., वही, पृष्ठ 32), क्योंकि एक महान कार्य तथा महापुरुष उनकी प्रतीक्षा में थे। श्री अमिताभ जी ने श्री रामकृष्ण आश्रम में रहकर श्री माधवराव से स्वामी विवेकानन्द जी के शिकागो के व्याख्यान का मराठी अनुवाद कराया। मानो श्री बाबा जी से प्राप्त दीक्षा की उनकी यही गुरुदक्षिणा थी। इसके बाद स्वामी अमिताभ जी ने उनके मामा श्री रायकर जी को बुलवाकर उनसे कहा कि श्री माधव राव (गुरुजी) को डाक्टर साहब के पास पहुँचा दें। और इस प्रकार से परम पूज्य डा. हेडगेवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लिए भावी सरसंघचालक की उपलब्धी हो गयी। 8 मार्च, 1937 को गुरुदेव श्री स्वामी अखण्डानन्द जी का मासिक श्राध्द था। अत: श्री गुरुदक्षिणा समर्पण के लिए यह अति उत्तम तिथि थी। शिकागो व्याख्यान का मराठी में अनुवाद श्री गुरुजी ने एक सप्ताह में ही पूर्ण कर लिया था। उसी दिन तिथि के अनुसार श्री गुरुजी ने अपनी आयु के 31 वर्ष पूर्ण कर लिये थे। इस कार्य के उपरान्त श्री गुरुजी, श्री स्वामी अखण्डानन्द जी के दु:ख में निष्क्राम्य हो गये थे। |
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