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प्रथम पत्र॥ श्री ॥ तब अपने संघ – कार्य की व्यवस्था का एक महत्व का प्रश्न सामने आता है। संघ कार्य अपने संविधान के अनुसार सुचारु रुप से चलेगा ही। उसी संविधान के अनुसार नूतन सरसंघचालक की योजना करने का वह प्रश्न है। अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल के जिन सदस्यों से मैं मिलकर विचार कर सका वे सब पुराने, दीर्घ काल के अनुभवी, मंजे हुए कार्यकर्ता है और भिन्न-भिन्न प्रांतो के संघचालकपद पर से कार्य में संलग्न है। सबसे बातें होने पर उन सबका सारभूत निर्णय प्रकट करने का मेरा सद्य:कालीन सरसंघचालक के नाते दायित्व है। उस दायित्व को पूरा करते हुए मैं यह निर्णय प्रकट कर रहा हूँ कि मेरे शरीर के शांत होने के पश्चात, सरसंघचालक – पद का भार, सबको परिचित श्री. मधुकर दत्तात्रेय उपाख्य बालासाहेब देवरस ग्रहण करेंगे। अपने कार्य की स्नेहपूर्ण एकात्मता की पध्दती, व्यक्ति-निरपेक्षता, ध्येयनिष्ठा आदि विशेषताओं को ध्यान में रखकर सब छोटे-बडे स्वयंसेवक बंधु अपने परमपूज्य सरसंघचालकजी के मार्गदर्शन में संघकार्य की पूर्ती हेतु काया-वाचा-मनसा जुटे रहेंगे और कार्य शीघ्र लक्ष्यपूर्ति कर सकेगा ऐसा मेरा विश्वास है। सब बंधुओं को सादर नमस्कार। इति शम्।
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